बरेली में 200 घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है,

सीबीगंज थाना क्षेत्र स्थित खलीलपुर गांव में जहां नगर निगम ने एक साथ करीब 200 घरों की दीवारों पर लाल क्रॉस (निशान) लगा दिए हैं। निगम की इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरी बस्ती में हड़कंप मच गया है। सालों से रह रहे लोग अब बेघर होने के डर से रात भर सो नहीं पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से तानाशाही है और बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उनके सपनों के आशियाने पर निशान लगा दिए गए हैं।

आजादी के पहले की बस्ती, अब ‘अवैध’ बताने की तैयारी,

खलीलपुर रोड पर बने ये मकान कोई दो-चार साल पुराने नहीं हैं। स्थानीय बुजुर्गों और निवासियों का दावा है कि उनकी यह बस्ती आजादी के पहले से आबाद है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोग यहां रहते आ रहे हैं और उनके पास मकानों के पुख्ता कागजात भी मौजूद हैं। लोगों का तर्क है कि जिस जमीन को नगर निगम अब अचानक अपना बता रहा है, वहां वे 70-80 सालों से काबिज हैं। अचानक हुई इस मार्किंग ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नगर निगम के नगर आयुक्त संजीव मौर्य का कहना है कि यहां 16 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है, जिसके दायरे में ये 200 मकान आ रहे हैं। इस पर स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय निवासी केएस रावत ने बताया, “आज तक इस रोड का कोई ऐसा नक्शा नहीं रहा। दस्तावेजों में यह रोड 12 से 16 फिट की है। निगम ने खुद यहां नाला बनाया और अब उस नाले के भी पार जाकर घरों को तोड़ने की बात कर रहे हैं। यह कोई एक्सप्रेसवे नहीं है, बल्कि गांव की एक सामान्य सड़क है। 16 मीटर चौड़ा रास्ता बनाने के चक्कर में पूरी बस्ती उजाड़ दी जाएगी।”
निगम की इस कार्रवाई में सबसे ज्यादा नाराजगी बिना किसी आधिकारिक नोटिस के निशान लगाने को लेकर है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि सरकारी काम का एक तय प्रोसेस होता है, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रख दिया गया। एक निवासी अल्पा रावत ने भावुक होते हुए कहा, “किसी के घर पर ऐसे आकर निशान कैसे लगाए जा सकते हैं? क्या अंदर बैठे लोगों पर घर गिरा देंगे? मेरी डिलीवरी के समय इस सड़क की हालत इतनी खराब थी कि मुझे पैदल चलना पड़ा। निगम को सड़क बनाने की चिंता नहीं है, लेकिन घर तोड़ने के लिए वे सबसे पहले पहुंच गए।”

 

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